"मैं राष्ट्रभक्त हूं और आजीवन राष्ट्र की सेवा करता रहूंगा !" ---किरण कुमार पाण्डेय
Book Summary
परीक्षाएं अपने अंतिम पड़ाव पर थीं, विपुल को सहसा यकीन नहीं हुआ ! पूरे साल इंटरनेट, फोन काल और विडियो गेम में मशगूल रहने के कारण उसका काफ़ी वक्त बर्बाद हो चुका था ऐसे में बोर्ड परीक्षाओं का उसे तनिक भी ख्याल न रहा ! मां-बाप, बड़े भैया, टीचर सबको वह बड़े इत्मीनान से बताया करता कि, "वह अपनी तैयारी कर लेगा !" एक समय के बाद थक हार कर सबने उसको बोलना छोड़ दिया ! बोर्ड परीक्षाओं के डेट शीट आने के बाद भी उसे लगता था कि, वह सब मैनेज कर लेगा, फिर क्या हुआ ? आइए पढ़ते हैं विपुल की कहानी जिसे लगता था कि, "वह सब मैनेज़ कर लेगा !"