"मैं राष्ट्रभक्त हूं और आजीवन राष्ट्र की सेवा करता रहूंगा !" ---किरण कुमार पाण्डेय
Book Summary
मित्रों ! जहां कामगार, मजदूर, नौकर, इंचार्ज, ठेकेदार, सेठ, साहूकार अथवा मालिक लोग रहेंगे वहां काम, मेहनत, ईमानदारी, तनख्वाह, बकाया इत्यादि के साथ -२ एक और बात की चर्चा सामान्य रूप से लोगों का ध्यान आकर्षित करती रहेगी और वो है, 'शोषण' ! इस वाक्य को चाहे शहद की शीशी अथवा चाशनी में डूबो कर ही क्यूं न बोला जाए, परन्तु इसमें छुपी कड़वाहट को मिटाया नहीं जा सकता, यह मेरा निजी अनुभव है ! मेरे अलावा और भी न जाने कितने लोगों का अनुभव होगा, कहना मुश्किल है, लेकिन सच्चाई यही है ! आम लोगों का शोषण कई प्रकार से होता है, अथ वैचारिक, मानसिक, शारीरिक, आर्थिक इत्यादि परन्तु आज चर्चा का विषय यह नहीं है अपितु चर्चा का विषय है कि, कौन है जो "शोषण" को खत्म कर सकता है ? आइए इस ज्वलंत विषय पर थोड़ा प्रकाश डाला जाए...