"मैं राष्ट्रभक्त हूं और आजीवन राष्ट्र की सेवा करता रहूंगा !" ---किरण कुमार पाण्डेय
Book Summary
परिवार का मुखिया शिक्षित न होने के कारण इधर उधर मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करता परन्तु उनका गुजारा बमुश्किल हो पाता ! उसके दोनों बेटे निकट गांव में बने सरकारी विद्यालय में पढ़ने जाते परन्तु उनकी दिलचस्पी पढ़ने-लिखने में न के बराबर थी ! दोनों बेटियां हाट में आने वाले जानवरों द्वारा त्यागे गए गोबर इकट्ठा करतीं जिनसे वे उपले बनातीं और प्रायः इन्हीं गोबरों से अनाज़ भी निकालतीं ! सम्भवतः आजकल की युवा पीढ़ी को यह ज्ञात न हो लेकिन यह शत् प्रतिशत सच है कि, "जल्दबाजी में जानवरों द्वारा ग्रहण किया गया अनाज़ ठीक से पच नहीं पाता और गोबर के साथ बाहर आ जाता है !" वे दोनों बहनें इसी गोबर से अनाज निकालतीं और फिर उन्हें सुखाकर पिसाया जाता और उसी आटें से बनी रोटियां पूरे परिवार की क्षुधा शांत करतीं ! क्रमशः...