"मैं राष्ट्रभक्त हूं और आजीवन राष्ट्र की सेवा करता रहूंगा !" ---किरण कुमार पाण्डेय
Book Summary
अंतिम क्रिया से निवृत्त होने के बाद अपने घनिष्ठ मित्र से अपने दिल का हाल कहते हुए मानव सिर्फ इतना ही कह सका, "एक पिता की 'कीमत' उसके गुजर जाने के बाद ही चलती है !"