Devesh Dixit - (25 March 2026)बिलकुल सही कहा है आपने व्यक्ति पृथ्वी पर इंसानों की अदालत से तो दांव पेंच कर के बच सकता है किन्तु परमात्मा के आगे व्यक्ति का कोई दांव पेंच नहीं चलता और उसे उसके बुरे कर्मों की सजा तो मिलकर ही रहती है।
"मैं राष्ट्रभक्त हूं और आजीवन राष्ट्र की सेवा करता रहूंगा !" ---किरण कुमार पाण्डेय
Book Summary
मेरी एक बात गांठ बांध लें, "कोई भी व्यक्ति चाहे कितना भी किंतु परन्तु क्यूं न करता फिरे, प्रकृति की न्याय व्यवस्था से कभी बच नहीं पाएगा !" ✍️ किरण कुमार पाण्डेय 'के के'