किरण कुमार पाण्डेय के के - (03 June 2026)विचारों से भरपूर लेख, स्थिति चिंताजनक परन्तु जिनसे जुड़ा है उन्हें समझ आ जाए यही आशा है ! एक बात मैं अपनी ओर से कहना चाहूंगा कि, चाटुकारिता कोई लत अथवा आदत नहीं बल्कि कुछ लोगों की जीवन-शैली बन चुकी है जिसे यदि वे स्वयं न बदलना चाहें तो हम और आप कुछ नहीं कर सकते ! पिछले तीन दशक से अनेकों ऐसे जीव मेरी नज़रों के सामने से गुजरे जिन्हें चाटुकारिता में ही सुख मिलता था/ है ! खैर आपकी लेखनी की प्रशंसा करनी पड़ेगी जो आपने इतना बड़ा जोखिम उठाया है !