डा.शुभ्रा वार्ष्णेय - (26 June 2026)जी बहुत सुंदर लिखा है प्राकृतिक बारिश और समय पर मौसम का बदलना प्रकृति के संतुलन के लिए बहुत जरूरी है
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ललित मोहन पाण्डेय - (26 June 2026)परिवर्तन,प्रकृति का अकाट सत्य है,प्रकृति के अनुरूप स्वयं को ढालने के लिए प्रकृति ने ही हमें बुद्धि और विवेक दिए हैं। बहुत अच्छा लेख 💐