किरण कुमार पाण्डेय के के - (26 August 2026)बेहद संवेदनशील मुद्दे पर आपने अपनी लेखनी चलाई है ! अधिकांश लोग तो इस मुद्दे से सौ कोस दूरी बना कर रखेंगे परन्तु कबूतर की तरह आंखें बंद कर लेने भर से बिल्ली का खतरा टलने से रहा ! ऐसे में जरूरी है कि सच्चाई का शुद्ध अंत:करण से निडरता पूर्वक सामना किया जाए ! मेरे विचार से, ईश्वर से जुड़ने का माध्यम चुनने के अलावा और कोई ठोस वजह नहीं दिखाई देता जब कोई व्यक्ति मंदिर परिसर में प्रवेश करता है परन्तु फोटोग्राफी, आडियोग्राफी, वीडियोग्राफी इत्यादि से कहीं कोई मुद्दा हासिल नहीं होने वाला अलबत्ता अगल-बगल, दूर-दराज़ के परिचित, अपिरिचित व्यक्तियों को अपनी उपस्थिति दर्ज़ करवा देने के अलावा इस प्रकार के कृत्यों का कोई उद्देश्य नहीं ! ***बताते चलें कि वर्ष २०२२ के आखिरी तीन दिनों में गोरखपुर, उत्तर प्रदेश में ७२ घंटे विश्व की सबसे लम्बी विष्णु महा हवन का आयोजन हुआ था जिसमें फोटो खिंचवाने, वीडियो शेयर करने के उद्देश्य से जितने लोग आए थे, उनमें से गिने चुने लोग ही वास्तव में हिस्सा बनने आए थे ! कुल दो दिनों में लगभग दस घंटे (जिसमें रात्रि दस बजे के बाद लगभग साढ़े चार घंटे) हवन करने के बावजूद मेरे द्वारा एक फोटो स्वयं के लिए क्लिक नहीं की गई !