कहते हैं आप कि यहां मैं अपने बारे में कुछ लिखूं, क्या लिखूं, लिख दूं यहां अपनी कुछ बचपन की नादानियां, या कि कुछ अपने जवां दिल की बदमाशियां लिखूं, या गुजिश्ता कुल जिंदगी पे कोई अफसाना हसीं लिखूं, यूं तो जिंदगी में सोज़े ग़म के तराने भी कुछ कम नहीं, बहरहाल समझ नहीं आता मुझे कि अपने बारे में मैं...More
कहते हैं आप कि यहां मैं अपने बारे में कुछ लिखूं, क्या लिखूं, लिख दूं यहां अपनी कुछ बचपन की नादानियां, या कि कुछ अपने जवां दिल की बदमाशियां लिखूं, या गुजिश्ता कुल जिंदगी पे कोई अफसाना हसीं लिखूं, यूं तो जिंदगी में सोज़े ग़म के तराने भी कुछ कम नहीं, बहरहाल समझ नहीं आता मुझे कि अपने बारे में मैं खुद ही क्या लिखूं..
-अतुल।
Book Summary
कृष्ण को केवल भगवान मानकर लिखने के बजाय, उन्हें एक मनुष्य, एक दार्शनिक, एक कर्मयोगी, एक मित्र, एक प्रेमी, एक कूटनीतिज्ञ और अंततः चेतना के विराट प्रतीक के रूप में समझने की कोशिश करते हुए इस लेख में कहीं अधिक गहराई लाने और इसे समकालीन बनाने का भरपूर प्रयास किया गया है। रचनाकार ने अपने लेखन स्वर के माध्यम से एक दार्शनिक, चिंतनशील, काव्यात्मक और प्रश्न उठाने वाले विचारक के रूप में स्वयं को भी स्थापित करना चाहा है।