कहते हैं आप कि यहां मैं अपने बारे में कुछ लिखूं, क्या लिखूं, लिख दूं यहां अपनी कुछ बचपन की नादानियां, या कि कुछ अपने जवां दिल की बदमाशियां लिखूं, या गुजिश्ता कुल जिंदगी पे कोई अफसाना हसीं लिखूं, यूं तो जिंदगी में सोज़े ग़म के तराने भी कुछ कम नहीं, बहरहाल समझ नहीं आता मुझे कि अपने बारे में मैं...More
कहते हैं आप कि यहां मैं अपने बारे में कुछ लिखूं, क्या लिखूं, लिख दूं यहां अपनी कुछ बचपन की नादानियां, या कि कुछ अपने जवां दिल की बदमाशियां लिखूं, या गुजिश्ता कुल जिंदगी पे कोई अफसाना हसीं लिखूं, यूं तो जिंदगी में सोज़े ग़म के तराने भी कुछ कम नहीं, बहरहाल समझ नहीं आता मुझे कि अपने बारे में मैं खुद ही क्या लिखूं..
-अतुल।
Book Summary
शिक्षक दिवस पर सामान्यतः हम विद्यालयी शिक्षा व शिक्षकों के संदर्भ में बात किया करते हैं, मैं पेशे से एक एडवोकेट हूं, शिक्षा एक ऐसी वस्तु है जो जीवनभर ग्रहण करते रहने में ही इसकी सार्थकता है। आज इस पवित्र विषय पर वकालत से जुड़े वरिष्ठ-कनिष्ठ अधिवक्ताओं को केंद्र में रखकर इस लेख की रचना की गई है।