Mrudula Kulkarni - (07 January 2026)यह रचना,शब्द नहीं मन की हर भावना का सच्चा रूप है..बहुत भावभीने विचार,हर एक विचार जैसे स्वानुभव पर मैं परखती गई..ऐसा लगा कि और थोड़ा अधिक पढ लूँ तो मन हल्का हो जाए..शब्द जब भावनाओं से सराबोर हो जाते हैं तब उनका जादू मन को मोहित किए बिना नहीं रहता.. हर वाक्य मन को छूने वाला..किस किसको उद्धृत करूँ?