सेवानिवृत, हिन्दी प्राध्यापक, लेखिका,साक्षात्कार कर्ता, मोटिवेशनल स्पीकर,भाषा साहित्य मंच,संस्थापक अध्यक्ष।
Book Summary
इस संग्रह में आप महानगरीय जीवन की बहुतेरी समस्याओं का प्रतिबिंब पाएँगे, जैसे ‘पड़ौसी या सिरदर्द’ में फ्लैट में रहनेवालों परेशानी का वास्तविक चित्रण है। इन कहानियों में कहीं आज भी बेटी की तुलना में अधिक महत्त्वपूर्ण बेटे हैं यथा ‘माँ की दुनिया’ तो कहीं अपनी बेटियों पर अभिमान करते ‘वर्क फ्राम होम’ के माता-पिता भी हैं। ‘मातृत्व अवकाश’ में अपने प्रति उदराता और उसी अवस्था में महरी के प्रति निष्ठुरता की शहरी सोच का, अमीरी-गरीबी के भेद का सही मनोविज्ञान है।
-क्रांति कनाटे
पूर्व संपादक ‘साहित्य परिक्रमा’