"जब प्यार 'ऑनलाइन' नहीं, बल्कि 'रूहानी' होता था... यह कहानी है 1998 के उस पंजाब की, जहाँ इश्क़ का इज़हार व्हाट्सएप पर नहीं, बल्कि गणित की कॉपी में छिपे मोरपंख और खतों से होता था।
12वीं बोर्ड की परीक्षा सर पर थी, लेकिन सुखी और जस्सी को चिंता नंबरों की नहीं, बल्कि उस जुदाई की थी जो हमेशा के लिए होने वाली थी। जस्सी पंजाब छोड़कर दिल्ली जा रही थी, और सुखी का दिल उस खाली क्लासरूम में अटक गया था।
क्या स्कूल का वो 'आखरी दिन' उनके प्यार का अंत साबित होगा? या कोहरे में लिपटी वो ट्रेन एक नई शुरुआत दे जाएगी? पढ़िए एक ऐसी प्रेम कहानी जो अधूरी होकर भी मुकम्मल थी।"