काई पो छे
Onkarlal Patle - (05 March 2025) 5
मेरी पतंग मेरा सूर्य को प्रणाम। सुन्दर कल्पना विकास। मेरे जीवन की डोर,प्रभु सदा तेरे हाथ रहें,‌यहां आपने अपनी रचना के साथ हिन्दू जीवन दर्शन को भी व्यक्त किए हैं। बहुत सुंदर अभिव्यक्ति है।

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ऋचा दीपक कर्पे - (11 January 2025) 5
वाह! 😃👏👏👏

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मैंने अंग्रेजी साहित्य में पढ़ाई कर,शौकिया हिंदी में लेखन कार्य करना आरंभ किया और अब ये जुनून बन चुका है।गीत,संगीत में भी मेरी रुचि है।

Publish Date : 11 Jan 2025

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