"मैं राष्ट्रभक्त हूं और आजीवन राष्ट्र की सेवा करता रहूंगा !" ---किरण कुमार पाण्डेय
Book Summary
नमस्ते और नमस्कार में, भेद न कोई 'ख़ास'
दोनों हैं अभिवादन, दोनों के भाव एक 'समान'
एक व्यक्ति से मिले कहीं जब, कहें सिर्फ 'नमस्ते'
एक से अधिक लोग मिले जब, अवश्य कहें 'नमस्कार'