• X-Clusive
“माँ का अनकहा सवाल”

“माँ का अनकहा सवाल”


नीना पराड़कर नीना पराड़कर

Summary

इस कविता में एक माँ की गहरी पीड़ा झलकती है, जिसे यह जानकर दुख होता है कि उसका अपना बच्चा अपने दिल की बातें दोस्तों से बाँट देता है, लेकिन...More
Poem
Sorry ! No Reviews found!

"मैं पुकार हुँ अनंत की,पतझड़के ह्रदय में सोए वसन्त की"

Publish Date : 28 Nov 2025

Reading Time :


Free


Reviews : 0

People read : 5

Added to wish list : 0