किरण कुमार पाण्डेय के के - (14 December 2025)कविराय गिरिधर का एक दोहा है "बीती ताहि बिसार दे आगे की सुध लें" जिसे हम लोग बचपन से सुनते आए हैं ! आज आपकी कविता पढ़कर उसकी याद ताजा हो गई ! बेहतरीन प्रस्तुति 👍👍✨✨
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Mrudula Raje - (10 December 2025)बहुत सुंदर भावमधुर कविता! आप की सकारात्मक सोच इतनी बढ़िया काव्य निर्मिती कर सकती है! बहुत बहुत बधाई! 🙏💐
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Mrudula Kulkarni - (09 December 2025)दुख के क्षणों में सुकून देनेवाली बड़ी सकारात्मक सोच देनेवाली रचना..हरिवंशराय बच्चन जी की जो बीत गई..सो बात गई..इस रचना की याद दिलाई आपने ऋचा जी.. बीती ताही बिसार दे..आगे की सुधि लेई..यही जिंदगी का वास्तविक रूप है..होना चाहिए..
Ajay Nidaan - (09 December 2025)बहुत खूब सार्थक लेखन और भावपक्ष भी बहुत ही खूबसूरत ढंग से रचना निर्मित की है आपने एहसास और अनुभव का सटीक परिचय दिया है जी