यह वर्ष भी बीत गया

यह वर्ष भी बीत गया


रमेश कुमार संतोष रमेश कुमार संतोष
Poem
Alka Puntambekar - (31 December 2025) 5

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Sudhir Deshpande - (27 December 2025) 4
अच्छी रचना। दृष्टि है तो परिवर्तन भी दिखता है। जब दिखता है तो कवि लिखता है। दिखने लिखने, लिखने लिखने में कवि की ही दृष्टि नजर आती है उस दृष्टि में ढलकर सृष्टि नजर आती है।

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Ajay Nidaan - (27 December 2025) 5
बहुत ही सार्थक लेखन का अदभुत परिचय दिया है आपने सारगर्भित और जीवंत एहसास को दर्शाती हुई रचना आपकी

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Publish Date : 26 Dec 2025

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