नमस्कार,
बच्चे बडे होते है तो साथ हम भी बडे होते जाते हैं. और एक दिन बच्चे अपने शिक्षा, कैरियर के लिए दूसरे शहर, देश निकल जाते है. उनका उडान भरना बहुत अच्छा लगता है, पर साथ ही ये एहसास होता है की घर खाली हो गया और सुबह / दिन भर की आपाधापी का कारण अब अपने पास नहीं है. इसी भाव को प्रस्तुत करती ये कविता.
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