किरण कुमार पाण्डेय के के - (28 March 2026)हृदय से निकले शब्द इतने मर्मस्पर्शी रहते हैं कि बयां करना भी मुश्किल होता है ! उन भावनाओं को अपने शब्दों का रुप दिया; आपका यह प्रयास वाकई काबिल-ए-तारीफ है ! ✨✨💐💐🙏🙏✍️✍️
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Reeta Khare - (28 March 2026)सच बच्चे मेहमान हो गये, वास्तविक चित्रण
नमस्कार,
बच्चे बडे होते है तो साथ हम भी बडे होते जाते हैं. और एक दिन बच्चे अपने शिक्षा, कैरियर के लिए दूसरे शहर, देश निकल जाते है. उनका उडान भरना बहुत अच्छा लगता है, पर साथ ही ये एहसास होता है की घर खाली हो गया और सुबह / दिन भर की आपाधापी का कारण अब अपने पास नहीं है. इसी भाव को प्रस्तुत करती ये कविता.
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