"मैं पुकार हुँ अनंत की,पतझड़के ह्रदय में सोए वसन्त की"
Book Summary
स्त्री जीवन में कई भूमिकाएँ निभाती है — माँ, बेटी, बहन और पत्नी. वह सबके लिए प्यार, देखभाल और सहारा देती है। ज़िम्मेदारियों के कारण वह अपनी भावनाएँ और थकान अक्सर छिपा लेती है। कभी-कभी वह मन ही मन सोचती है कि मैं सबके लिए जीती हूँ, पर मेरे लिए कौन जिएगा? फिर भी वह मुस्कुराकर आगे बढ़ती रहती है, क्योंकि उसके अंदर प्रेम और सहनशीलता की अद्भुत शक्ति होती है।