अतुल अग्रवाल - (04 September 2026)कृष्ण को जानना आसान नहीं है। क्योंकि कृष्ण कोई एक व्यक्ति नहीं हैं। वे एक साथ बहुत कुछ हैं - वे यशोदा की गोद में पलता हुआ नटखट बालक हैं, गोपियों के बीच बांसुरी बजाता हुआ प्रेम हैं, राधा की आँखों में ठहरा हुआ विरह हैं, मित्र के लिए अपना सर्वस्व छोड़ देने वाला सखा हैं, कंस के सामने खड़ा विद्रोह हैं, रणभूमि में खड़ा हुआ सारथी हैं, अर्जुन के भीतर टूटते हुए मन को संभालती हुई आवाज़ हैं, और उसी क्षण विराट रूप धारण कर देने वाली वह चेतना भी हैं, जिसमें सम्पूर्ण अस्तित्व समाया हुआ दिखाई देता है। /अतुल