• X-Clusive
मेरे चले जाने के बाद

मेरे चले जाने के बाद


नीना पराड़कर नीना पराड़कर

Summary

हर स्त्री अपने पीछे सिर्फ यादें नहीं, अपना एक पूरा अस्तित्व छोड़ जाती है— घर के हर कोने में, हर बर्तन में, हर रिश्ते में। वह चली जाती...More
Poem
Seema Puranik - (28 September 2026) 5
👌👌 स्त्री के अस्तित्व का बहुत ही सार्थक और भावपूर्ण वर्णन ।

0 0

Ajay Nidaan - (27 September 2026) 5
खूपच छान आणि सार्थक लेखण केले आहे तुम्ही उत्कृष्ट रचना तुमची

1 1

Megha Shovakar - (27 September 2026) 5
Wow what a Heart touching poem. Every woman will relate to this.

1 1

स्वाति उज्जैनकर - (27 September 2026) 5
वाचता वाचता डोळे भरून आले. खूप मार्मिक काव्य रचना.

1 1


"मैं पुकार हुँ अनंत की,पतझड़के ह्रदय में सोए वसन्त की"

Publish Date : 27 Sep 2026

Reading Time :


Free


Reviews : 4

People read : 9

Added to wish list : 0