राज ऋषि शर्मा हिंदी, डोगरी और अंग्रेजी भाषाओं के बहुमुखी प्रतिभाशाली लेखक, पत्रकार और चित्रकार हैं। उन्होंने अब तक विभिन्न विधाओं में 29 पुस्तकें लिखी हैं, जिन्हें पाठकों ने खूब सराहा है। वे मुख्य रूप से हिंदी में लिखते हैं। उनकी कई रचनाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं और संग्रहों में...More
राज ऋषि शर्मा हिंदी, डोगरी और अंग्रेजी भाषाओं के बहुमुखी प्रतिभाशाली लेखक, पत्रकार और चित्रकार हैं। उन्होंने अब तक विभिन्न विधाओं में 29 पुस्तकें लिखी हैं, जिन्हें पाठकों ने खूब सराहा है। वे मुख्य रूप से हिंदी में लिखते हैं। उनकी कई रचनाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं और संग्रहों में प्रकाशित हुई हैं और आकाशवाणी पर भी प्रसारित की गई हैं।
1975 में उन्होंने 'महक' और 2022 में 'महकती वाटिका' नामक पत्रिकाओं का संपादन और प्रकाशन किया। 1977 में उन्होंने 'राजर्षि कल्चर क्लब' का भी संचालन किया। वर्तमान में, वे 'महकती वाटिका' नामक काव्य संग्रहों की श्रृंखला का संपादन और प्रकाशन कर रहे हैं।
राज ऋषि शर्मा को 'साहित्यालंकार' और 'साहित्य श्री' जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।
Book Summary
'ऐसा होता तो नहीं' एक ऐसा उपन्यास है जिसके विषय में ऐसा कहा जा सकता है कि 'ऐसा होता तो नहीं' ! फिर भी ऐसा होता है। इस उपन्यास को लिखते समय हर पल इस बात का ध्यान रखा गया है कि पढ़ते समय पाठकों को यह पूरी तरह सत्य ही लगे। हालांकि इससे जुड़ी सभी घटनाएं या दुर्घटनाएं सच हैं, लेकिन इन सबके पश्चात भी यह उपन्यास काल्पनिक है। बहुत ही रोचक, मार्मिक, हृदयस्पर्शी तथा रोमांटिक उपन्यास ! इसे आप एक बार पढ़ना शुरू करते हैं, तो फिर पूरी तरह से पढ़े बिना छोड़ने का मन नहीं करता है। काश ! ऐसा नहीं होता !