आरव ने अम्मा की लकड़ी की कटोरी अपने पास रख ली।
अब वह हर सुबह उसी मंदिर की सीढ़ियों पर बैठता है, वही स्टोव, वही खिचड़ी, और वही मुस्कान लिए।
"खिचड़ी गरम है... कोई भूखा हो, तो आ जाए," वह हर सुबह कहता है।
उस कटोरी में अब सिर्फ़ खिचड़ी नहीं, अम्मा की ममता, प्रेम, और करुणा का स्वाद भी है।
"दुनिया में बड़ी-बड़ी दौलतें हैं, पर जो प्रेम, ममता और दया से भरी उस एक कटोरी खिचड़ी में है, वह हर किसी को नसीब नहीं होती।"