ललित मोहन पाण्डेय - (12 August 2026)वही हाल मेज का हुआ,जो मोबाइल के समक्ष पुस्तक, कैमरा,रेडियो,टॉर्च,घड़ी,टेप रिकॉर्डर,कैलकुलेटर,नुक्कड़ नाटक,नौटंकी आदि का हुआ। बहुत अच्छा एवं यथार्थवादी लेख। 💐💐
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किरण कुमार पाण्डेय के के - (12 August 2026)"वक्त किसी का सगा नहीं !" जब तक वक्त को आपकी आवश्यकता होती है तब तक वह अपने साथ रखता है अन्यथा आपको अलग-थलग पड़ने के लिए छोड़ देता है ! लेखिका ने बेहद संवेदनशील विषय को मेज़ के माध्यम से समझाने का प्रयास किया है, काबिले तारीफ है ! यदि लेख का भाव पाठकों तक अक्षरशः पहुंचता है तो यह लेखिका की बहुत बड़ी उपलब्धि साबित होगी और समाज में पनप रहे अनचाहे विचारों की पौधों को मिलने वाली खाद, पानी और हवा पर अंकुश लगाया जा सकेगा ! उत्तम विचार, उत्तम लेख ✅✅👍👍✨✨✍️✍️🙏🙏💐💐