चूड़ियाँ

चूड़ियाँ


वंदना  बाजपेयी वंदना बाजपेयी
Short story
मयूरा काशीकर - (30 June 2026) 5
बहुत सुंदर....बदलाव पर अमल करने का बेहतरीन संदेश

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किरण कुमार पाण्डेय के के - (28 June 2026) 5
परिवर्तन संसार का नियम है ! समाज में समय -२ पर बदलाव होते रहते हैं ! यह बात और है कि कुछ सहज रूप में स्वीकार कर लिए जाते हैं तो कुछ के स्वीकार करने में काफ़ी वक्त लगता है ! विधवा विवाह को सरकार व समाज से बहुत पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है ! ऐसे कई उदाहरण हैं जिन्हें हम स्वयं जानते हैं जहां महिलाओं की दुबारा शादी कराई गई ! आज पुरुष वर्ग भी यह स्वीकार कर चुका है कि किसी महिला के विधवा होने में उसकी कोई ग़लती नही ! मैं जहां तक समझ रहा हूं कुछ चुनिंदा लोगों को छोड़ दिया जाए तो आज अधिकांश समाज समय की पुकार को जान समझ चुका है ! आपका प्रयास सराहनीय है जो आपने एक सशक्त विषय पर अपनी कलम चलाई है !

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Reeta Khare - (28 June 2026) 5
ओह समाज की विडम्बना, नारी की मनःस्थिति को बहुत सुंदर, रोचक ढंग से प्रस्तुत किया आपने चल चित्र की भांति आंखों से गुजरती बढ़िया हृदय स्पर्शी कहानी👌👌

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prabha tiwari - (28 June 2026) 5
बहुत ही शुरू से आखिर तक पाठक को बांधे रखा कहानी के पात्र के जीवन में कितने-कितने मोड़ आए बहुत ही सरल भाषा, में व्यक्त किया भाव पूर्ण दर्शाया। समाज आज भी स्त्री की मनोदशा को अनदेखा कर थोपी गई रीति रिवाज को मान्यता देता है। अंत इसका बहुत बढ़िया किया है । ऐसी मान्यताओं को खत्म करने का समय आ गया है आज भी जहां औरत को एक वस्तु समझते है।

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Publish Date : 27 Jun 2026

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