किरण कुमार पाण्डेय के के - (07 May 2026)रौद्र रस में लिखी गई रचना सराहनीय तो है परन्तु जिस विषय पर लिखी गई है उस पर किस मुंह से तारीफ़ की जाए जब समाज में रहने वाले दो धड़े एक दूसरे की इज्जत तार तार करने में लगे हुए हैं ! बेशक इसमें शत-प्रतिशत दोष पुरुषों का है ! जहां तक नगन्ता परोसने का सवाल है तो इससे ज्यादा शर्मनाक बात क्या होगी कि नग्नता परोसने वाले से ज्यादा गुनाहगार नग्न होकर नाचने वाली बालाएं हैं ! खैर विषय बहुत विस्तृत है, अनेकों विचार हैं लेकिन "जब हम सुधरेंगे तब जग सुधरेगा" का फार्मूला अपनाना पड़ेगा अन्यथा बोलते -२ थक जाएंगे सुनने वालों के कान में जूं तक नहीं रेंगेगी ! आप के लेख में दो जगह गलतियां हैं, पहली यह कि एक जगह आपने लिखा है कि, "समय बीता दी की शादी हो गई" और दूसरी जगह लिखा है कि, "ये सुनकर सिम्मी दी हताश हो गई और छत से कूद कर जान दे देती है"; दोनों विरोधाभास हैं कृपया पहली लाइन को दुरुस्त करें ! दूसरी गलती यहां है "आइए आपको आज साक्षी जी की निजी जीवन के बारे में कुछ जानते हैं" ! यहां इसके स्थान पर "आइए आज आपको साक्षी जी की निजी जीवन के बारे में कुछ बताते हैं" अथवा "आइए आपको साक्षी जी से मिलवाते हैं और उनसे उनके निजी जीवन की कुछ बातें करते हैं" लिखेंगे तो बेहतर होगा ! शेष सब ठीक है ! बेहतर प्रयास ✨✨🙏🙏💐💐