"मैं तलाशती हूँ मंजिल अपनी
लोग ढूँढ रहे मेरे कदमों के निशां
उन्हें खबर कहाँ जाना है मुझकों
मेरी मंशा मुझे ले जाए जहाँ"
प्रतिलिपि लेखक
https://pratilipi.app.link/doxDPe9PH1b
"मैं तलाशती हूँ मंजिल अपनी
लोग ढूँढ रहे मेरे कदमों के निशां
उन्हें खबर कहाँ जाना है मुझकों
मेरी मंशा मुझे ले जाए जहाँ"
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Book Summary
"बड़ी मां, बड़ी मां देखो ना आज फिर एक नन्ही परी आई है ।" 20 साल की सरस्वती, आश्रम की बड़ी माँ...या यूं कहें इस आश्रम में आज सबको आसरा देने वाली ,"लक्ष्मी जी" जिन्होंने इस आश्रम को बसाया था ।