परिक्रमा मार्ग में अनगिनत तीर्थ, आश्रम और ग्राम आते हैं—ओंकारेश्वर, महेश्वर, मंडलेश्वर, जबलपुर, भेड़ाघाट। पर हर स्थान केवल ऐतिहासिक नहीं, मानवीय भी है। गाँवों की सरलता, अन्नपूर्णा-सी गृहस्थ स्त्रियाँ, नर्मदा भक्तों की निश्छल सेवा—यह सब परिक्रमार्थी को सिखाता है कि आध्यात्म समाज से अलग नहीं, बल्कि उसी में रचा-बसा है।
- पुष्पा त्रिपाठी "पुष्प"