मौनी अमावस्या मेरे लिए आत्मा की गहराइयों में उतरने का पावन अवसर है। इस दिन का मौन शब्दों का अभाव नहीं, बल्कि हृदय की सबसे कोमल आवाज़ है। जब मैं चुप होती हूँ, तब भीतर का शोर थम जाता है और आत्मा का दीपक उजास फैलाने लगता है। यह पर्व मुझे सिखाता है कि सच्ची शांति बाहर नहीं, अपने भीतर मिलती है। मौन के क्षणों में मैं स्वयं से जुड़ती हूँ, अपने मन को समझती हूँ और ईश्वर के और भी निकट हो जाती हूँ।