Namita Gupta - (09 August 2026)समाज की एक विकृत सच्चाई भी है, जिसने परत दर परत आईने की तरह सब स्पष्ट कर दिया ।बहुत ही मार्मिक लेकिन हृदय को झकझोरने वाली बेहतरीनकहानी।
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मयूरा काशीकर - (04 August 2026)प्रेम और त्याग का सुंदर वर्णन
किरण कुमार पाण्डेय के के - (30 July 2026)विचारों की गतिशीलता लेखनी में समा गई है ! कहानी सच भी हो सकती है, इस विचार को नकारा नहीं जा सकता लेकिन यह सत्य है कि मानव समाज का वीभत्स चेहरा दिखाई दिया इस कहानी में, पूर्णतया झकझोर देने वाला एवं स्वयं से प्रश्न पूछने वाला कि, क्या मैं इंसान हूं ?"✅✍️✨🙏💐
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Reeta Khare - (30 July 2026)बहुत ही रोचक, हृदयस्पर्शी, यथार्थ के धरातल से ली गई शानदार कहानी👌👌💐💐
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रचना नौडियाल - (01 April 2026)बेहद रुहानी और आत्मा को झकझोरने वाली कहानी लिखी है आपने कविता जी, ढ़ेर सारी शुभकामनाएं 💐💐💐
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सीमा प्रियदर्शिनी सहाय - (01 April 2026)सस्पेंस,डर, सबकुछ है इस कहानी में। बहुत अच्छी कहानी। बहुत बहुत शुभकामनाएं 🌹🌹