"मैं राष्ट्रभक्त हूं और आजीवन राष्ट्र की सेवा करता रहूंगा !" ---किरण कुमार पाण्डेय
Book Summary
"वर्तमान भौतिकतावादी युग में जहां सब कुछ क्रय-विक्रय किया जा रहा है वहां यह मानकर चलना कि कुछ 'मुफ्त' में मिल रहा है गले नहीं उतरता फिर भी 'मुफ़्त की रेवड़ियों' का ढिंढोरा पीटते असंख्य मंच न सिर्फ दिखाई देते हैं अपितु हमारी मानसिक वृत्ति को पूरी तरह बदलने का 'साहस' भी रखते हैं !" जो लोग किसी अन्य व्यक्ति की बातों में आकर मात्र अपना 'नाम' और मोबाइल 'नंबर' देने की भूल कर बैठते हैं, सही मायनों में एक 'उत्पाद' बनकर रह जाते हैं !"