"मैं राष्ट्रभक्त हूं और आजीवन राष्ट्र की सेवा करता रहूंगा !" ---किरण कुमार पाण्डेय
Book Summary
"जिस व्यक्ति में राष्ट्र के प्रति कोई प्रेम भाव न हो, जीवों के प्रति दया न हो, इंसानियत का नामोनिशान न हो, केवल अपनों और अपने से सरोकार हो ऐसे लोगों को अवश्य यह सोचना चाहिए कि, वे क्या कर रहे हैं ?" यदि इस लेख से ऐसे किसी एक व्यक्ति के जीवन में 'लेशमात्र' भी बदलाव आता है तो मैं समझूंगा कि मेरा प्रयास 'सफल' रहा अन्यथा लेख के शीर्षक की भांति मेरी लेखनी भी 'बंजर' ही रही !