शीर्षक - प्रेम
उन्मुक्त हो आचार-विचार
जग समता का राग रहे।
जन-जीवन में भेद नही
सबका सबसे अनुराग रहे।।
जग में नही कोई छोटा या बड़ा
सबको अधिकार समान मिले।
जड़ से जन जीवन की तृप्ति
जगतीतल में सम्मान मिले॥
दीनन की हित जान समझ
सब मिलकर पूर्ण विकास करें।
बेकारी-बीमारी पर हो दुधारी चोट
विद्या का प्रबल प्रकाश करें॥
हर घड़ी ध्यान बस रहे यही
नर-नारी बीच मान-सम्मान रहे।
स्व संतति मान दुख प्रसव सही
मानस में बसता मर्म सत्यमान रहे।।
*उषा श्रीवास वत्स*