ख़ुदा का घर

ख़ुदा का घर


प्रबोध गोविल प्रबोध गोविल

Summary

यह नाटक व्यंग्य के रूप में बढ़ती हुई जनसंख्या, उससे उत्पन्न समस्याओं और व्यवस्थागत कठिनाइयों पर प्रकाश डालता है।
Other Stories

Publish Date : 05 Jun 2026

Reading Time :

Chapter : 1


Free


Reviews : 0

People read : 6

Added to wish list : 0