"मैं तलाशती हूँ मंजिल अपनी
लोग ढूँढ रहे मेरे कदमों के निशां
उन्हें खबर कहाँ जाना है मुझकों
मेरी मंशा मुझे ले जाए जहाँ"
प्रतिलिपि लेखक
https://pratilipi.app.link/doxDPe9PH1b
"मैं तलाशती हूँ मंजिल अपनी
लोग ढूँढ रहे मेरे कदमों के निशां
उन्हें खबर कहाँ जाना है मुझकों
मेरी मंशा मुझे ले जाए जहाँ"
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Book Summary
जब जब मेरे दिल में तेरे लिए तड़प सी उठती है तब तक मेरे दिल से एक नई गजल निकलती है जो मेरी आंखों की स्याही से पन्ने पर उभर जाती है और दिल की कहानी मंशा की जुबानी बन जाती है।