किरण कुमार पाण्डेय के के - (30 April 2026)संकीर्ण मानसिकता पर ज़ोरदार प्रहार, राष्ट्रीय एकता और अखंडता को प्रथम मानते हुए समस्त भारत को एक परिवार के सूत्र में बांधने की कोशिश करती यह रचना विचारणीय, अनुकरणीय एवं प्रशंसनीय है !
नमस्कार,
जहां हम वसुधैव कुटुंबकम का विचार आत्मसात करने की सोच रहें है, वहीं अभी भी कुछ लोग मेरी भाषा, मेरा प्रदेश जैसी बातों पर अड़े हुए है. इस कविता में मेरे विचार प्रस्तुत कर रही हूं...घर मेरा हिंदुस्तान.
अवश्य पढ़े और आशिर्वाद दे
धन्यवाद