Mrudula Kulkarni - (03 May 2026)आजकल अकेले रहनेवालों की संख्या बढ़ती जा रही है..कारण कैसा भी हो.. पर परिवारजनों के साथ रहने में जो सुकून मिलता है,वह एकाकीपन में कहाँ? परिवारजनों के साथ भले ही मतभेद हो,पर उनसे मिलनेवाला सुरक्षित आधार अकेले रहने में कहाँ? इस विचित्र समस्या पर अधिक गंभीरता से सोचना आवश्यक है..यह मेरे अपने विचार हैं..मतभिन्नता हो सकती है..