प्रकृति का नाट्य : स्त्री-पुरुष-भ्रम

प्रकृति का नाट्य : स्त्री-पुरुष-भ्रम


अतुल अग्रवाल अतुल अग्रवाल

Summary

यहां स्त्री और पुरुष के संबंध को डिफाइन करने से ज्यादा, उस भ्रम को पकड़ना मुझे ज्यादा रोचक लगा जिसमें दोनों स्वयं को स्वतंत्र कर्ता...More
Poem
Alka Puntambekar - (16 August 2026) 5
बेहतरीन

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Mrudula Raje - (16 August 2026) 5
बहुत बढ़िया!

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कहते हैं आप कि यहां मैं अपने बारे में कुछ लिखूं, क्या लिखूं, लिख दूं यहां अपनी कुछ बचपन की नादानियां, या कि कुछ अपने जवां दिल की बदमाशियां लिखूं, या गुजिश्ता कुल जिंदगी पे कोई अफसाना हसीं लिखूं, यूं तो जिंदगी में सोज़े ग़म के तराने भी कुछ कम नहीं, बहरहाल समझ नहीं आता मुझे कि अपने बारे में मैं...More

Publish Date : 16 Aug 2026

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