प्रकृति का नाट्य : स्त्री-पुरुष-भ्रम

प्रकृति का नाट्य : स्त्री-पुरुष-भ्रम


अतुल अग्रवाल अतुल अग्रवाल

Summary

यहां स्त्री और पुरुष के संबंध को डिफाइन करने से ज्यादा, उस भ्रम को पकड़ना मुझे ज्यादा रोचक लगा जिसमें दोनों स्वयं को स्वतंत्र कर्ता...More
Poem
किरण कुमार पाण्डेय के के - (16 August 2026) 5
राजर्षि भर्तहरी के वैराग्य शतकम् के अनुसार... भोगा न भुक्ता वयमेव भुक्ताः तपो न तप्तं वयमेव तप्ताः। कालो न यातो वयमेव याताः तृष्णा न जीर्णा वयमेव जीर्णाः॥ अर्थात "हमने विषयों या सुखों को नहीं भोगा, बल्कि भोगों ने ही हमें भोग लिया (हमारा जीवन चूस लिया) ! हमने कोई तपस्या नहीं की, बल्कि चिंताओं और दुखों की आग में हम खुद तप गए ! समय कहीं नहीं गया, बल्कि हम ही समय के साथ दुनिया से चले गए ! हमारी पाने की इच्छाएं कभी पुरानी या समाप्त नहीं हुईं, लेकिन हम स्वयं बूढ़े और कमज़ोर हो गए !" इस प्रकार आपका प्रयास सराहनीय है क्योंकि आपने सत्य को उजागर करने वाले एक कृति को एक नए रूप में समाज के समक्ष प्रस्तुत किया है !

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Alka Puntambekar - (16 August 2026) 5
बेहतरीन

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Mrudula Raje - (16 August 2026) 5
बहुत बढ़िया!

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कहते हैं आप कि यहां मैं अपने बारे में कुछ लिखूं, क्या लिखूं, लिख दूं यहां अपनी कुछ बचपन की नादानियां, या कि कुछ अपने जवां दिल की बदमाशियां लिखूं, या गुजिश्ता कुल जिंदगी पे कोई अफसाना हसीं लिखूं, यूं तो जिंदगी में सोज़े ग़म के तराने भी कुछ कम नहीं, बहरहाल समझ नहीं आता मुझे कि अपने बारे में मैं...More

Publish Date : 16 Aug 2026

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