डा.शुभ्रा वार्ष्णेय - (13 September 2026)बहुत सुंदर वर्णन किया है राधे राधे जय श्री कृष्ण🙏🙏
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किरण कुमार पाण्डेय के के - (05 September 2026)इस लेख में आपने जितने उद्धरण दिए हैं, सम्भवतः पाठकों के लिए बिल्कुल नया अनुभव है ! बेहद सलीके से चुने हुए शब्दों एवं तथ्यों के आधार पर इसकी रचना की है जो इसे बार-बार पढ़ने को प्रेरित करेगी ! सम्भवतः शापिज़न पर इस तरह के लेख चुनिंदा लेखक ही लिखते हैं ! कोटिश: धन्यवाद 💐💐✅✅💯💯🙏🙏✍️✍️
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अतुल अग्रवाल - (04 September 2026)कृष्ण को जानना आसान नहीं है। क्योंकि कृष्ण कोई एक व्यक्ति नहीं हैं। वे एक साथ बहुत कुछ हैं - वे यशोदा की गोद में पलता हुआ नटखट बालक हैं, गोपियों के बीच बांसुरी बजाता हुआ प्रेम हैं, राधा की आँखों में ठहरा हुआ विरह हैं, मित्र के लिए अपना सर्वस्व छोड़ देने वाला सखा हैं, कंस के सामने खड़ा विद्रोह हैं, रणभूमि में खड़ा हुआ सारथी हैं, अर्जुन के भीतर टूटते हुए मन को संभालती हुई आवाज़ हैं, और उसी क्षण विराट रूप धारण कर देने वाली वह चेतना भी हैं, जिसमें सम्पूर्ण अस्तित्व समाया हुआ दिखाई देता है।/अतुल
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prabha tiwari - (04 September 2026)बहुत सुंदर पूरा वर्णन किया कृष्ण का और अंत में सुंदर संदेश देते हुए अपने उपसंहार किया।