कृष्ण

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कृष्ण को केवल भगवान मानकर लिखने के बजाय, उन्हें एक मनुष्य, एक दार्शनिक, एक कर्मयोगी, एक मित्र, एक प्रेमी, एक कूटनीतिज्ञ और अंततः चेतना...More
Article & Essay Poem
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कहते हैं आप कि यहां मैं अपने बारे में कुछ लिखूं, क्या लिखूं, लिख दूं यहां अपनी कुछ बचपन की नादानियां, या कि कुछ अपने जवां दिल की बदमाशियां लिखूं, या गुजिश्ता कुल जिंदगी पे कोई अफसाना हसीं लिखूं, यूं तो जिंदगी में सोज़े ग़म के तराने भी कुछ कम नहीं, बहरहाल समझ नहीं आता मुझे कि अपने बारे में मैं...More

Publish Date : 04 Sep 2026

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