शीर्षक :- श्रीगणेश जी
कृपा करो,कृपा करो गणेशजी।
मिटा दो प्रभु, हमारे सारे कष्ट क्लेशजी।।
प्रेम के नाम पर, छल की दुकान है यहां।
मान का नाम ना रहे,यही चाहता है ये जहां।।
जंजाल और झंझटो में, डूबे न देश जी।
मिटा दो प्रभु, हमारे सारे कष्ट क्लेशजी।।
दूर होते जा रहे हैं लोग करार से।
करते हैं खिलवाड़,ये रोज परिवार से।।
दो बुद्धि गंदा न करें, ये परिवेशजी।
कृपा करो,कृपा करो गणेशजी।।
हम हैं सहमें-सहमें प्रभु सर्वदा से ही।
हमको बचा लो प्रभु, घोर विपदा से जी।।
कृपा बरसाओं, भक्तों पर तो विशेषजी।
मिटा दो प्रभु, हमारे सारे कष्ट क्लेशजी।।
संस्कृति मेरा बस सदा आबाद ही रहे।
विवेकानंद का संदेश कथा सीता की कहे।।
दिन-दुगनी करे, उन्नति ये मेरा देश जी।
कृपा करो, कृपा करो गणेशजी।।
*उषा श्रीवास वत्स*