"मैं पुकार हुँ अनंत की,पतझड़के ह्रदय में सोए वसन्त की"
Book Summary
हर स्त्री अपने पीछे सिर्फ यादें नहीं,
अपना एक पूरा अस्तित्व छोड़ जाती है—
घर के हर कोने में, हर बर्तन में, हर रिश्ते में।
वह चली जाती है,
पर उसकी आवाज़, उसका स्पर्श और उसका प्रेम
घर में हमेशा गूँजता रहता है।