यह कविता सिर्फ एक कविता नहीं, हम सबकी अपनी कहानी है। मैंने इसे तब लिखा था जब मैंने सोचा कि जिंदगी क्या है? क्या सिर्फ मंजिल पाना है? नहीं। जिंदगी मंजिल नहीं, सफर है। जिंदगी का मज़ा मंजिल पर पहुँचने में नहीं, बल्कि उस रास्ते में है जो हम अपनों के साथ तय करते हैं। इसलिए रोते-रोते नहीं, मुस्कुराते हुए चलो।