41मैं इंदोरी हूं भिया!
जहां पोहे का नमकीन स्वाद और जलेबी की मिठास हर सुबह को खुशनुमा बना दे, वो शहर कोई और नहीं 'अपना इंदोर है भिया!
विक्रमादित्य की नगरी को छोड़ हम सन् 2001 में अहिल्याबाई और महाराज होलकर का साम्राज्य कहलाने वाले इंदौर शहर में आये। फूटी कोठी, साठ फीट रोड के नाम से प्रसिद्ध तथा एशिया की तब सबसे बड़ी अवैध कॉलोनी, सुदामा नगर में हम रहते थे। जो कि विकास की दहलीज़ लांघकर अब वैध हो गई है। वैसे तो इंदौर शुरू से 'मिनी' बॉबे के नाम से मशहूर रहा है। परंतु इंदौर का दिल 'मेगा' है, और वो इसलिए क्योंकि जो यहां आता है यहीं का होकर रह जाता है; ये मेरा अनुभव कहता है। इस शहर की आबोहवा आदती बना देती है अपने स्वाद और ज़िंदादिली का। हर वर्ग के व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित करता यह शहर इंदौर, औद्योगिक शहर 'पीथमपुर' से लेकर मां चामुण्डा की नगरी 'देवास' तक अपनी बाहें पसार सबको गले से लगाता है।
सराफा व्यापारियों तथा खान पान की दुकानें भाईचारा और सद्भाव की मिसाल कायम करते हुए सराफा इंदौर के दिल
'राजवाड़ा' की धड़कनें बरक़रार रखते हैं। वहीं से होते हुए किताबों का 'खजूरी बजार' पढ़ाकुओं की जन्नत सा है।
खान पान और ज्ञान के साथ-साथ सिंगार पसंद स्त्री वर्ग के लिए 'आड़ा बाज़ार' आर्टिफिशियल जूलरी का जहान है। जहां से सिंगार लिए बिना इंदौर की शायद ही कोई बेटी विदा होती है।
ये तो था इंदौर का दिल अब समय के साथ अपना रूप निखारता, नगर सेवा और टेम्पो को इतिहास बनाता यह शहर आइ बस और सिटी बस को अपनी लंबी चौड़ी सड़कों पर, रगों में लहू की तरह दौड़ाने लगा।
और ये आइ बस और सिटी बस सफर तय करती हैं राजेंद्र नगर से विजय नगर तक और इसी के बीच हम देख और महसूस करते हैं इंदौर की ज़िंदगी को।
इंदौर का नामचीन इलाका 'विजय नगर' युवाओं में खासा लोकप्रिय है, यहां 'मिनी बॉंबे' की तर्ज़ पर बड़े-बड़े मॉल, पब्स, डिस्को और शॉपिंग सेंटर्स हैं। जो लार्जर देन लाइफ वाली ज़िंदगी का अक्सर एहसास करवाते हैं। ज़िंदगी को खुलकर जीने वालों के लिए विजय नगर यहां बहुत मायने रखता है।
वहीं बंबई के सिद्धि विनायक की तरह हमारे बप्पा गणपति यहां 'खजराना' क्षेत्र में विराजते हैं जिसे हमारा शहर 'खजराना गणेश' के नाम से जानता है। लेकिन यहां भी देखेंगे तो सौहार्द्र की अनोखी मिसाल पाएंगे क्योंकि हिंदू देवताओं में अति पूजनीय हमारे गणेश यहां मुस्लिम आबादी वाले संसार में बसते हैं। है ना मज़े की बात!
ऐसे ही पूजा के साथ साथ यहां पेट पूजा करने वाले लोगों की कमी बिल्कुल भी नहीं! इंदौर के लोग खाने पीने के खासे शौकीन माने जाते हैं और इन लोगों की पेट पूजा खत्म होती है, यहां के प्रसिद्ध फूड हब 'छप्पन दुकान' पर आकर!
मेरा मायका शहर के एक कोने 'कलेक्ट्रेट' पर ओर मेरा ससुराल दूजे कोने 'ब्रिलिर्यंट कन्वेशन' के नज़दीक है।
इन दोनों के बीच का सफर मानो इंदौर का सफर जाहिर करता है। जहां भी, जिस गली जाओ 'इंदौर रहेगा नंबर वन' की आवाज़ लगाती सफ़ाई अभियान वालों की कचरा गाड़ी पूरे जोश के साथ विकास का हाथ थाम आगे बढ़ती हुई पाओगे।
इस शहर का हर कोना अपनी अलग दास्तां सुनाता है। फिर चाहे वह 'बड़ा गणपति' से लेकर 'गांधीनगर का एयरपोर्ट' हो, या 'पाटनीपुरा' और 'मालवा मिल' से लेकर 'लैंटर्न चौराहा' जीवन और विकास के पहलुओं को हर कदम पर बदलते दिखलाते हैं।
विरासत और विकास जहां हाथ थामकर चलते हैं वो शहर कोई और नहीं इंदोर ही है भिया!