4सागर की लहर,
नहीं खोजती डगर।
बनाकर पूरा करती है,
अपनी हर सफर।
हमें सीखना चाहिए इससे।
आगे बढ़ सकते हैं जिससे।
बिना लक्ष्य यहां कोई नहीं।
अगर हैं तो कह रहा उनसे।
जरुरी है जीवन के लिए।
नई राह बनाकर चलना।
चलना जिस दिन आएगा।
आ ही जाएगा सम्हलना।
कुछ तो हम सीख लेलें.।
औरों की तरह दिख लेले।
अनुकरण गलत नहीं हैं।
जिसका अनुकरण वह सही है।
गिरधारी लाल चौहान
सक्ती छत्तीसगढ़