8*बुंदेली दोहा प्रतियोगिता -256*
*प्रदत्त विषय- चला ( प्रचलन)*
दिनांक -21-2-2026
संयोजक राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
आयोजक जय बुंदेली साहित्य समूह टीकमगढ़
*प्राप्त प्रविष्ठियां :-*
*1*
बखत बदल गव आज कौ, बदल गऔ इंसान।
दुनियाँ कौ जौई चला, पइसा है बलवान।।
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-विद्या चौहान, फरीदाबाद
*2*
करी बिदेसन की नकल, जा रव कितै समाज।
बफर भोज कौ देस में, चला चलो है आज।।
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-डॉ. देवदत्त द्विवेदी बड़ामलहरा
*3*
ढला-चला चल रय चला, जिनमें कछू न तत्त।
खर्च ब्याव में ऊपरी, को है कौन महत्त।।
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- अमर सिंह राय, नौगांव
*4*
माते मुखियन के चला,रात हते ते पैल ।
अब तौ सबही लुप्त हैं,पकरै अपनीं गैल ।।
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-शोभाराम दाँगी, नदनवारा
*5*
ढला चला जैसौ चलै, चलौ जान दो आज।
धरी आँदरी भारजा, है अँदरन कौ राज।।
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- अंजनी कुमार चतुर्वेदी निबाड़ी
*6*
बुरव चला जलदी मिटै,बिनती हे भगवान।
नकुअन में दम हो गई,रो रव है इनसान।।
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- वीरेन्द्र चंसौरिया टीकमगढ़
*7*
देखो हमने नव चला, दुल्लू शर्म न खात।
नचतइ अपने व्याह में,पकरै दूला हात।।
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-सुभाष सिंघई , जतारा
*8*
अजब चला संसार कौ,जियत न देवें मान
मरतइ गुन भय दोगुने,करवें खूब बखान। ।
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-आशा रिछारिया, निवाड़ी
*9*
आज चला ऐसो चलो, सबनो टच के फोन।
इते उते को सब पतो, बगल पतो नइ कोन।।
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-विशाल कड़ा'मांझी',बडोरा घाट, टीकमगढ़
*10*
फटे पेंट पैरत फिरै,गैलन में बतयाय।
चला आज कौ देख कैं,सिर मौरौ चकराय।।
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-प्रदीप खरे 'मंजुल' टीकमगढ़
*11*
नओ-नओ चालो चलो, मिलो रोग में जोग।
मोंड़ा मोंड़ी ब्याह दें ,बिन देखे संजोग।।
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- प्रभा विश्वकर्मा, जबलपुर
*12*
चला न रावन के रये, चूर भये अम्भान।
सौनै की लंका जली, भई वंश की हान।।
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- एस. आर. 'सरल',टीकमगढ़
*13*
चला बुरव जो दायजो, दीन पिता हैरान।
कैसैं पीरे हाथ हों, होवै कन्यादान।।
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-श्यामराव धर्मपुरीकर,गंजबासौदा
*14*
चला दायजे कौ चलो, नैयां गांधी छाप।
बिटिया स्यानी है घरै, सोचत बैठो बाप।।
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-भगवान सिंह लोधी "अनुरागी", हटा
*15*
चला बफर को चल गओ, ठांड़े -ठांड़े खायँ।
भर-भर थाली लेत हैं, छोड़ अधूरो आयँ।।
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-तरुणा खरे'तनु' जबलपुर
*16*
चला चलो गव श्याम को,दूद मठा घी खाव।
ग्वालन छेंकी गैल में,माखन पैल छुड़ाव।।
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-प्रमोद मिश्रा, बल्देवगढ़
*17*
चला चलौ अब देश में,बढ़ गये दारुखोर।
रोजगार मिलतौ नहीं,लरका बनते चोर।।
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- मूरत सिंह यादव दतिया
*© संयोजक राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'*
आयोजक जय बुंदेली साहित्य समूह टीकमगढ़
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