3भूला नहीं हूं डगर।
चलना जो इस पर।
याद मुझे है पूरा पूरा।
इसमें चलना जीवन भर।
डगर को कोई कैसे भूले।
जो भूले उसे कैसे मिले।
करता हूं उसका कदर।
मैं भूलूंगा वह भूलेगा।
फिर कहां मंजिल मिलेगा।
होगा भटकना फिर दर दर।
इससे उत्तम याद रखिये।
जीवन में आबाद रखिये।
लेते रहिये उसका खबर।
तुम जानो तो ओ जाने।
तुम मानो तो ओ माने।
रखकर चलिए नजर।
सफलता तो डगर से।
मत मुँह मोडे़ सफर से।
जाने न पाए अवसर।
गिरधारी लाल चौहान
सक्ती छत्तीसगढ़