• 26 February 2026

    कहां पहूंचा

    डगर

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    कितनी दूर चला, और कहां पहूंचा।

    कहां तक जाने का, बताओ समूचा।


    मंजिल पास है, या बहुत ही दूर।

    कितना चलना होगा, चलना मंजूर।

    घने वन प्रदेश मिलेगे, पेड़पौधे ऊंचा।


    राह कैसा है, चल सक रहे हो।

    थकावट तो नहीं मन तन, लग रहे हो।

    अब नहीं भटकोगे, सही मार्ग सूझा।


    विघ्न बाधा मिल सकते, दूर कर लेना।

    चल इस राह खुद को, मशहूर कर लेना।

    कोई मिला था चलते, उससे क्या पूछा।


    आज भी मंजिल दूर, कल भी ऐसी रहेगा।

    बहुत दूर चला है थोडा़और बस चलेगा।

    क्यों इस राह पर ही, तुझको चलना सूझा।


    गिरधारी लाल चौहान

    सक्ती छत्तीसगढ़



    गिरधारी लाल चौहान


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