2कैसे पूछू राह के बारे।
राह पर बैठा मन मारे।
उसी समय आदमी दिखा।
रोका उनको और पूछा।
हँसकर उसने जवाब दिया।
मेरे मन को वह भांप लिया।
कहा सुनो मेरे बात प्यारे।
पूछने से नहीं हिचकिचाते।
पूछकर मंजिल है पाते।
भटकने से पूछना अच्छा।
भटकने वाले हैं बताते।
तुम्हारे कैसे चढे़ हैं पारे।
गंतव्य तक है जाना।
मंजिल को है पाना।
नहीं है पछताना।
दुनियां को है आजमाना.।
मिलते सबका नजारे।
अन्जान राहे बनती सरल।
उपायों से होता सफल।
सोच समझ से बनती आदतें।
जीवन को देती है राहतें।
विचार अपना सुधारें।
गिरधारी लाल चौहान
सक्ती छत्तीसगढ़